पहले जैसा अब कहीं,होता नहीं कमाल
फँसा धोखे शेर हो, चूहा कुतरे जाल
कभी उतरता ही नहीं, सत्ता गजब बुखार
बारह बरस पोंगरी, अजमा ले सरकार
सुशील यादव दुर्ग