सरसी छंद में परिवर्तित दोहे 2
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हमको सिखा गए हैं जाते ,ये गोरे अंग्रेज।
खूब करो सरहद रखवाली , रख तलवारें तेज ।।
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आप कभी हिम्मत ना हारें, साहस ना दें छोड़ ।
बात भला क्या एक करोना , जग में रोग करोड़ ।।
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कर गया हाथ हजार वाला,उल्टे सीधे काम ।
मुंह ढाप के अब है सोना ,दर्शन दुर्लभ राम ।।
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यहां भला हो किसे शिकायत ,कोई क्यूं नाराज।
है नगरी सारी माया की। ,सब के सर में ताज ।।
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संभावना बढ़ती बारिश की, बाढ़ नदी संकेत।
देखूं तुझको किसान बैठा ,कौन देखता खेत।।
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दांवपेंच सब है कानूनी , फसलों को आघात।
घिसता किसान अपनी जूती ,पागल के अनुपात ।।
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मारा हुआ वक्त के हाथो ,ये बचा बदनसीब।
है जिंदगी लाचार वंचित ,गिनती बढ़ा गरीब ।।
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सुशील यादव
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