Saturday, 24 September 2022

समय मिले तो

समय मिले तो ढूढना ..... ## सुख की चादर तान के, सोए रहते आप समय मिले तो ढूंढना , आस्तीन के सांप # सभी समझ को भूलकर,बातें रख लो याद हरा -भरा भी सूखता, बिन मिट्टी बिन खाद # शनै-शनै छोटा हुआ, संयम का आकार अब तो केवल क्रोध का, फैला खरपतवार # छोटा अब लगने लगा, रोटी का अनुपात आश्वासन की बेड़ियां नियमित शाम-प्रभात # करते-करते तंग हूं, मैं अपना किरदार अब तो मेरे हाल पर, मुझको छोडो यार # गांधी मिलकर गोडसे, पूछते कुशलक्षेम इसे नोट महिमा कहें, या मानवता प्रेम # शायद मेरी साधना,निहित कहीं है खोट हर ऊंचाई नापकर,पाते रहता चोट # तेरा होना इतर सा ,देता था एहसास तेरे बगैर यूं लगे, चला गया मधुमास # कैसे जाने फैलता ,जीवन का आकार साँसों से होता नहीं ,घड़ियों का व्यापार

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