जाते हुए सिखा गए,ये गोरे अंग्रेज।
रखवाली सरहद करो, रख तलवारें तेज ।।
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हिम्मत कभी न हारिए, साहस भी मत छोड़ ।
एक करोना बात क्या, जग में रोग करोड़ ।।
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हाथो हजार कर गया,उल्टे सीधे काम ।
मुंह ढाप सोया अभी,दर्शन दुर्लभ राम ।।
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किसे शिकायत हो भला ,कोई क्यूं नाराज।
माया नगरी खेल में,सब के सर में ताज ।।
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बारिश की संभावना, बाढ़ नदी संकेत।
तू किसान बैठा यहां,कौन देखता खेत।।
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दांवपेंच कानून के , फसलों को आघात।
घिसता किसान जूतियां ,पागल के अनुपात ।।
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हाथ वक्त मारा हुआ ,ये बचा बदनसीब।
वंचित है लाचार है ,गिनती बढ़ा गरीब ।।
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सुशील यादव
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