Friday, 16 September 2022

 जाते हुए सिखा गए,ये गोरे अंग्रेज।

रखवाली सरहद करो, रख तलवारें तेज ।।

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हिम्मत कभी न हारिए,  साहस भी मत छोड़ ।

एक करोना बात क्या, जग में रोग करोड़ ।।

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हाथो हजार कर गया,उल्टे सीधे काम ।

मुंह ढाप  सोया अभी,दर्शन दुर्लभ राम ।।

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किसे शिकायत हो भला ,कोई क्यूं नाराज। 

माया नगरी खेल में,सब के सर में ताज ।।

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बारिश की संभावना, बाढ़ नदी संकेत।

तू किसान बैठा यहां,कौन देखता खेत।।

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दांवपेंच कानून के , फसलों को आघात।

घिसता किसान जूतियां ,पागल के अनुपात ।।

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हाथ वक्त मारा हुआ ,ये बचा बदनसीब।

वंचित है लाचार है ,गिनती बढ़ा गरीब ।।

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सुशील यादव 

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