Dohe written by Sushil Yadav Durg Chhtisgarh
Saturday, 24 September 2022
पहले जैसा अब कहीं,होता नहीं कमाल फँसा धोखे शेर हो, चूहा कुतरे जाल कभी उतरता ही नहीं, सत्ता गजब बुखार बारह बरस पोंगरी, अजमा ले सरकार सुशील यादव दुर्ग कोई तिलस्म सा लगे, तेरा रूप निखार 👌 मौसम कितना छीन ले,नया नौ लखा हार सुशील यादव दुर्ग
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