Saturday, 24 September 2022
मायावी
मायावी जड़ खोदना,चढ़ना सीख पहाड़
वज्र सरीखे काम हैं ,जान दधीची हाड
मन की हर अवहेलना,दूर करो जी टीस
व्यवहारिकता जो बने ,ले लो हमसे फीस
सुशील यादव
तेरा दिल बस छोड़ के ,बाकी सब बकवास
तुझको केवल देख के ,आनन रहे उजास
सुशील यादव
साल नया स्वागत करो ,हो व्यापक दृष्टिकोण
अंगूठा छीने फिर नहीं ,एकलव्य से द्रोण
सुशील यादव
ध्वनि की आहट में सहज,मारा करता तीर
प्रतिमा केवल पूज के ,एकलव्य गंभीर
सुशील यादव ,दुर्ग
भारी जैसे हो गए,नये साल के पांव
खाली सा लगने लगा,यही अनमना गांव
सुशील यादव
ना राहत की योजना ,ना विकास के पाँव
जिसको पूछे वो कहे ,छुआ तरक्की गांव
सुख के पत्तल चांट के ,गया पुराना साल
दोना भर के आस दे , बदला लिया निकाल
कलेंडर सब उतार दो ,गया पुराना साल
नये साल की स्वागते,रंग नई दीवाल
सुशील यादव
तेरे पास अकल नहीं ,ले ले ज़रा उधार
तुझसे रिश्ता यूँ लगे ,कोई कर्ज उधार
पीसा की जमीन खड़ी, झुकती सी मीनार
बीते साल यही कसक,हुए रहे भयभीत
कोसो दूर हमसे रहे ,सपने औ मनमीत
नवा साल उतरे मुड़ी ,जाबे काखर गांव |
साधन तोर घटे हवे ,काला खात-बचांव ||
सुरतावत बनते बने,अइसन पाछू साल
अतका खिलिस कमल इहां,गाले गाल गुलाल
सुशील यादव दुर्ग
जतका तोर उमर हवे,
एकलव्य रूठा ना रहे ,अर्जुन से गुरु द्रोण
अंगद के जैसा जमे,उखड़े कहीं न पाँव
लूटे सौ-सौ गजनवी,उजड़ न पाए गाँव
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